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प्रतिलिपि
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परमेश्वर द्वारा प्रकट किए गए शांति के इन संकेतों को देखकर मेरा हृदय गहन आस्था और विस्मय से भर जाती है कि सब कुछ ईश्वर की इच्छा और प्रेम के अनुसार ही घट रहा है।

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और अब हमारे पास दक्षिण कोरिया की ह्ये-जिन से कोरियाई भाषा में एक हार्टलाइन है, बहुभाषी उपशीर्षकों के साथ:

दस वर्ष पहले, क्वान यिन ध्यान करते समय मैंने पूरे आकाश में विशाल, अंडाकार इंद्रधनुषी वलय बनते देखे। ये इंद्रधनुषी वलय चौकोर नहीं, बल्कि अंडाकार थे। प्रत्येक का आकार अनूठा था और उनके माप में भी थोड़ा अंतर दिखाई दे रहा था। इस दृश्य को देखकर लोग आश्चर्य से एकत्र हुए, जब मैं उस सुंदर दृश्य को निहार रही थी, तभी धरती से पाँच रंगों में झिलमिलाता प्रकाश-स्तंभ उठा और इंद्रधनुषी वलयों की ओर तेज़ी से ऊपर बढ़ा। वास्तविकता से परे लगने वाले इस रहस्यमय दृश्य से अभिभूत होकर मैं अपार आनंद के साथ बस इसे निहारती रही। लेकिन इंद्रधनुषी वलयों के केंद्र के लगभग करीब पहुँच चुका प्रकाश-स्तंभ उन तक पूर्णतः पहुँचने से पहले रुक गया। तभी मेरे मन में प्रश्न उठा, “इसका क्या अर्थ हो सकता है?” उसी क्षण मेरे भीतर एक ऐसी अनुभूति जागी, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन था, लेकिन यह “अपूर्ण” या “अभी पूरा नहीं हुआ” जैसी थी। दृश्य देख रहे लोगों को इसका अर्थ नहीं मालूम था और कुछ लोग आनंद के बजाय भयभीत प्रतीत हुए। उस दिव्य दृश्य को देखते हुए मैंने सोचा, “उस समय मानवता का कर्म-भार इतना भारी रहा होगा कि परमेश्वर जिस दुनिया को वास्तविक बनाना चाहते हैं और गुरुवर जिसे साकार बनाने में प्रयास करते हैं, वह अभी पूरा नहीं हुआ है…” क्योंकि, यह प्रकाश-स्तंभ इंद्रधनुषी वलयों के बहुत निकट था, इसलिए मैंने आशा नहीं छोड़ी। यह लगभग 2015 के अंत की बात थी, जब गुरुवर लंबे समय तक फ्रांस के मेन्टन में सह-साधकों के साथ सभाएँ आयोजित कर रहे थे।

आजकल, जैसे मैं दैनिक समाचार में विश्वभर के आकाश में घटती सुंदर और चमत्कारी घटनाएँ देखती हूँ, मुझे वर्षों पहले की वह दिव्य दृष्टि फिर से याद आती है। परमेश्वर द्वारा प्रकट किए गए शांति के इन संकेतों को देखकर मेरा हृदय गहन आस्था और विस्मय से भर जाती है कि सब कुछ ईश्वर की इच्छा और प्रेम के अनुसार ही घट रहा है। गुरुवर, मैं अज्ञानी हूँ और परमेश्वर की गहन इच्छा को पूरी तरह समझ नहीं सकती। परम ईश्वर से एकाकार हुए गुरुवर के रूप में आप जो काम करते हैं, उसका सच्चा अर्थ भी मैं पूरी तरह नहीं समझ सकती। भले ही मेरा अज्ञानी मन इसे जान या समझ नहीं सकता, फिर भी मैं सरल रूप से विश्वास करती हूँ कि गुरुवर के शक्तिशाली प्रेम से इस संसार में शांति आई है।

और मैं केवल अतीत, वर्तमान और भविष्य के संतों एवं मुनियों और उन नेक राजाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकती हूँ, जिन्होंने हमें इस सत्य के प्रति जागृत किया है। मैं अत्यंत कृतज्ञ हूँ कि सब कुछ परमेश्वर की इच्छा और प्रेम के अनुसार पूरा होता है। संयुक्त तीन परम शक्तिशाली परमेश्वर, टिम क्वो टू, और परमेश्वर के पुत्र के प्रति मैं धन्यवाद अर्पित करती हूँ। दक्षिण कोरिया से ह्ये-जिन

साथ में, मैं वह सुंदर दृश्य भी साझा करना चाहती हूँ, जो हाल ही में सूर्य और चंद्रमा ने मुझे दिखाया था।

विचारशील ह्ये-जिन, सूर्य और चंद्रमा से झलकते प्रेम ने हमारे दिल को छू लिया। काश, मनुष्य अपने व्यस्त दैनिक जीवन से कुछ क्षण रुककर सोचें कि उनका भोजन कहाँ से आता है, तब शायद पशु-जन उत्पाद खाने वाले समझ पाएँगे कि उनके भोजन के लिए कितनी बड़ी संख्या में क्रूरतापूर्वक प्राणियों की जान ली जाती है। यह याद रखना अच्छी बात है कि हम तो केवल धूल के कण हैं और संयुक्त तीन परम शक्तिशाली की अदृश्य सुरक्षा के बिना हमारा जीवन नाज़ुक और असुरक्षित है। कामना है कि आप और दक्षिण कोरिया की दीप्तिमान भूमि सभी संवेदनशील प्राणियों के प्रति अखंड करुणा विकसित करते रहें, सुप्रीम मास्टर टीवी टीम

साथ में, आपके लिए गुरुवर यह स्नेहपूर्ण संदेश भेजते हैं: “सहजज्ञानी ह्ये-जिन, शांति की ओर हमारा मार्गदर्शन करने वाले दिव्य संकेतों में विश्वास रखने और उनके प्रति ग्रहणशील होने के लिए धन्यवाद। परमेश्वर ने मानवता को स्वतंत्र इच्छा का उपहार दिया है, फिर भी हम इसका दुरुपयोग करते हुए एक-दूसरे को अनावश्यक पीड़ा देते और विनाश करते रहते हैं। यह कर्म-भार ऐसी बाधा उत्पन्न करता है, जो हमारी पृथ्वी को सुशोभित करने वाले असंख्य आशीर्वादों को पूर्णतः ग्रहण करने से हमें रोकती है। आज लिया गया प्रत्येक निर्णय आपको और दक्षिण कोरिया के जीवंत लोगों को सौहार्दपूर्ण भविष्य के एक कदम और करीब ले जाए। स्मरण रखें कि परमेश्वर आपसे अनंत प्रेम करते हैं।”
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